14 जुलाई 2019…
क्रिकेट इतिहास की वह तारीख जिसे दुनिया आज भी याद करती है।
एक ऐसा फाइनल जिसने रोमांच की सारी सीमाएँ तोड़ दीं, लेकिन साथ ही करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में एक सवाल भी छोड़ दिया —
“क्या सच में इंग्लैंड सही मायनों में विश्व विजेता था?”
यह मुकाबला था इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच।
स्थान था क्रिकेट का मंदिर "लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउन्ड"
यह सिर्फ एक मैच नहीं था।
यह भावनाओं, संघर्ष, किस्मत और विवाद का ऐसा संगम था जिसे क्रिकेट प्रेमी शायद कभी भूल नहीं पाएंगे।
न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी।
उनकी शुरुआत धीमी रही क्योंकि इंग्लैंड के गेंदबाज बेहद अनुशासित लाइन पर गेंदबाजी कर रहे थे।
Henry Nicholls ने शानदार पारी खेली और टीम को संभाला।
दूसरी ओर कप्तान Kane Williamson ज्यादा देर टिक नहीं पाए।
न्यूज़ीलैंड ने 50 ओवर में 241 रन बनाए।
यह स्कोर बड़ा नहीं था, लेकिन फाइनल के दबाव में चुनौतीपूर्ण जरूर था।
242 रन का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखी।
जल्दी विकेट गिरने लगे।
पूरे स्टेडियम में सन्नाटा था।
लेकिन तभी मैदान पर आए Ben Stokes।
उन्होंने अकेले दम पर मैच को जीवित रखा।
हर गेंद के साथ तनाव बढ़ता जा रहा था।
इंग्लैंड को अंतिम ओवर में जीत के लिए 15 रन चाहिए थे।
गेंदबाजी कर रहे थे ट्रेंट बोल्ट
फिर आया वह पल जिसने इतिहास बदल दिया।
जब बेन स्टॉक्स ने गेंद को खेलकर दूसरा रन लेने की कोशिश की, तभी न्यूज़ीलैंड के फील्डर का थ्रो सीधे स्टोक्स के बल्ले से टकराया और गेंद बाउंड्री के बाहर चली गई।
अंपायरों ने इंग्लैंड को 6 रन दे दिए।
यहीं से विवाद शुरू हुआ।
कई पूर्व खिलाड़ियों का मानना था कि नियमों के अनुसार इंग्लैंड को 5 रन मिलने चाहिए थे, 6 नहीं।
यह फैसला मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन गया।
मैच टाई और फिर सुपर ओवर
50 ओवर खत्म हुए।
दोनों टीमों का स्कोर बराबर - 241
अब खेल सुपर ओवर में पहुँचा।
पूरी दुनिया टीवी स्क्रीन से चिपकी हुई थी।
इंग्लैंड ने सुपर ओवर में 15 रन बनाए।
अब न्यूज़ीलैंड को जीत के लिए 16 रन चाहिए थे।
न्यूज़ीलैंड ने भी शानदार बल्लेबाजी की।
आखिरी गेंद पर उन्हें 2 रन चाहिए थे।
लेकिन वे सिर्फ 1 रन ही ले सके।
और फिर…
सुपर ओवर भी टाई हो गया।
अब आया क्रिकेट इतिहास का सबसे विवादित नियम
सभी को लगा कि अब दूसरा सुपर ओवर होगा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उस समय ICC के नियमों के अनुसार अगर सुपर ओवर भी टाई हो जाए, तो जिस टीम ने मैच में ज्यादा boundaries लगाई हों, उसे विजेता घोषित किया जाएगा।
इंग्लैंड ने पूरे मैच और सुपर ओवर मिलाकर न्यूज़ीलैंड से ज्यादा चौके-छक्के लगाए थे।
और इसी आधार पर इंग्लैंड को विजेता घोषित कर दिया गया।
आखिर दूसरा सुपर ओवर क्यों नहीं?
यही सवाल आज तक क्रिकेट प्रेमियों को परेशान करता है।
जब एक सुपर ओवर टाई हुआ, तो फिर दूसरा सुपर ओवर क्यों नहीं कराया गया?
इतने बड़े टूर्नामेंट का फैसला बॉउन्ड्रीस गिनकर कैसे किया जा सकता था?
क्या क्रिकेट सिर्फ चौके-छक्कों का खेल है?
अगर कोई टीम बेहतर गेंदबाजी करे, विकेट बचाए, दबाव झेले — तो उसका मूल्य कम हो जाता है?
मैच खत्म होते ही सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया।
कई दिग्गज खिलाड़ियों ने इस नियम की आलोचना की।
क्रिकेट प्रेमियों का कहना था:
“विश्व कप जैसी बड़ी ट्रॉफी boundaries count से नहीं तय होनी चाहिए।”
कई लोगों को लगा कि न्यूज़ीलैंड के साथ अन्याय हुआ।
क्योंकि:
- मैच बराबरी पर था,
- सुपर ओवर बराबरी पर था,
- फिर भी हार सिर्फ एक technical rule की वजह से मिली।
हार के बाद भी Kane Williamson ने जिस शांति और सम्मान के साथ प्रतिक्रिया दी, उसने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया।
कोई गुस्सा नहीं, कोई बहाना नहीं, सिर्फ मुस्कान।
यही वजह है कि उस फाइनल के बाद न्यूज़ीलैंड भले ट्रॉफी ना जीत पाया हो, लेकिन करोड़ों लोगों का सम्मान जरूर जीत गया।
हालांकि इस विवाद के बाद ICC पर भारी दबाव पड़ा और आखिरकार बाद में नियम बदला गया।
अब अगर knockout मैच का सुपर ओवर टाई होता है, तो दूसरा सुपर ओवर कराया जाता है।
यानी वही बात जो 2019 में होनी चाहिए थी।
2019 का विश्व कप फाइनल क्रिकेट इतिहास का सबसे रोमांचक मुकाबला जरूर था, लेकिन साथ ही यह खेल के सबसे विवादित पलों में भी गिना जाता है।
उस दिन इंग्लैंड ने ट्रॉफी उठाई, लेकिन न्यूज़ीलैंड ने दुनिया का सम्मान जीता।
और शायद इसी वजह से आज भी जब 2019 विश्व कप फाइनल की बात होती है, तो लोग सिर्फ रोमांच नहीं याद करते…
वे उस “boundary rule” को भी याद करते हैं जिसने क्रिकेट की आत्मा पर सवाल खड़े कर दिए थे।

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